प्यारी पृथ्वी सहित, दिव्य ब्रह्मांड, उनकी बिंदी के मात्र साएं है, वह जगत जननी जगदंबा ने हमारे साथ आज के क्षण बिताए है। जिसके सामने, हरी - हर नतमस्तक, जो मेरे सतगुरू का, विश्व समस्त, उनकी आंखों में डुबकी लगा, आज हम, महा कुंभ नहाए है, वह अथाह सागर से, हम ने प्रेम के अमूल्य मोती पाए हैं, वह जगत जननी जगदंबा ने हमारे साथ आज के क्षण बिताए है। साहब, मदिरा जैसे सस्ते नशे, हम नहीं करते, हम तो उनके, हास्य के नशे से भव सागर तरते, जिसका ध्यान नहीं लगता, उनके लिए ये योजना लाए है, उनकी हँसी से, आज हमने ध्यान की स्थिति के, अनुभव पाए है, वह जगत जननी जगदंबा ने हमारे साथ आज के क्षण बिताए है। प्यारी पृथ्वी सहित, दिव्य ब्रह्मांड, उनकी बिंदी के मात्र साएं है, वह जगत जननी जगदंबा ने हमारे साथ आज के क्षण बिताए है।
વાહ વાહ ....
ReplyDelete:) tnQ
ReplyDeleteJai Baba Swami. Very beautiful creations!!
ReplyDelete:) tnQ , it is only blessings of swamiji ...
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