यहा है भाषा अनेक पर भाव है एक ..
है संस्कृति अनेक, पर दिल से सब एक ...
जी हा! वो है हमारा भारत देश ...

यहाँ सब के दिल में प्रेम का पंछी..
वचन बद्ध, जेसे सब है रघुवंशी
मिलकर गाये "जन गन" काव्यंशी

हर दिलमें भारतमाँ का है चेहरा...
जय हिंद घोष से जहा होता सवेरा
जि हा! वह भारत देश है मेरा


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