| यहा है भाषा अनेक पर भाव है एक .. है संस्कृति अनेक, पर दिल से सब एक ... जी हा! वो है हमारा भारत देश ... यहाँ सब के दिल में प्रेम का पंछी.. वचन बद्ध, जेसे सब है रघुवंशी मिलकर गाये "जन गन" काव्यंशी हर दिलमें भारतमाँ का है चेहरा... जय हिंद घोष से जहा होता सवेरा जि हा! वह भारत देश है मेरा |
आभार गुरुदेव
हे ईश्वर मेरा रोम रोम तेरा आभारी है, जितनी और जैसी दी ये जिंदगी बहुत प्यारी है। मानव देह में जीवन , मीठे संबंधों की फुलवारी है, गुरु-शिष्य के संबंध में मेरा गुरु परब्रह्म देह धारी है। नाजों से संभाला, प्यार से सिंची मुझ फूल क्यारी है। कर्म काटे और रति भर पीड़ा नहीं, तेरी लीला न्यारी है। प्रार्थना भी क्या ही करूं,करुणा सारी मुझपे वारी है, बहुत दिया है तूने प्रभु , अब ऋण चुकाने की मेरी बारी है।
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