कही तो मै गलत हू
तेरी हसी को देख एक सुकुन मिलता है
फिरसे जिन्दगी जीने का जनून मिलता है
पता है की कुछ भी अपना नही है
फिर भी सबको प्यार देने का रंगून मिलता है

दिल की गिरह में बस एक ही सवाल मिलता है
अगर तू मेरे ही भीतर है तो फिर क्यों
मुझे हर दफा गम का ही पैगाम मिलता है ?
फिर सोचती हू कही तो मै गलत हू
इसीलिए ही सत्य के साये में भी दर्द का कानून मिलता है

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