सत्य कनिका 3
गली गली में ज्ञानी ज्यादा , घर घर बटता ज्ञान
जाने सारि दुनिया को, खुद से लेकिन अनजान
कुत्ते पाले बैठे महात्मा, बिल्कुल कुत्तो जैसा रुजान
प्रेम छोड़ सब गुण धरे, कुत्तो में कुत्ता महान
बहते पानी को ऐसे देखे, घट-घट जा खोले विज्ञान
ये घाट पानी मीठा, वहां कम, वो घाट में है पेय प्रधान
प्यासे बैठे मर गये, जब तक प्रमाणित होता विज्ञान
ज्ञान विज्ञान की होली जला कर, अब गुरुचरण को थाम
- श्वेता जोशी
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