सत्य कनिका 2
फूलो की बगिया में भवरे तो नजर आएंगे ही ,
जहा कौवे नजर आए , समजलो कचरा हो रहा है ।
जागृतो की महफिल में , अमृत बरसेगा ही ,
जहा तबाही मची है , वहाँ परम ज्ञानी सदियों से सो रहा है ।
वैसे निर्वाण पाया जिसने, उसका मालिक एक
जहा दो है, वो महात्मा ट्राफिक पुलिस बन रहा है।
- श्वेता जोशी
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