उसके रंग में रंग ना सकी



सामने था तो कुछ बोल ना सकी
जब वोह चला गया तो रो ना सकी
करम धरम कुछ याद नहीं रहा
मरना चाहा पर मर ना सकी

इस पार पत्थर तरे, उस पार लाश
दोनोंमें उसकी प्रेम की लालाश
वो तो मेरे पास था, मर मर के भी
जिन्दा तो मै थी, तर ना सकी

किरतार करतार अहंकार में लिपटी
मुझे लगा मै उस की बाह में सिमटी
बाह नहीं वोह तो दिल ले खड़ा
कुपात्र में उसका प्यार देख ना सकी

अनुभूति तरफ खीचा मेरा अंग अंग
सत्य में डुबाया लगाया प्रेम रंग
बिंदल डूबी साथ लेके अहंकार
मै में मै रंगी उसके रंग में रंग ना सकी


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