| माफ़ करना तू ठहेरा भगवन तुजे दोस्त माननेकी भूलकी माफ़ करना तेरी दासी की जगह प्रियांसी बननेकी भूलकी माफ़ करना तुजे आकर में पाकर तेरे पास आनेकी कोशिशकी माफ़ करना चरणरज का स्थान छोड़ तेरे दिलका नूर बननेकी भूलकी माफ़ करना दासी बनने के लायक नहीं और तेरी मीरा बननेकी भूलकी माफ़ करना |
आभार गुरुदेव
हे ईश्वर मेरा रोम रोम तेरा आभारी है, जितनी और जैसी दी ये जिंदगी बहुत प्यारी है। मानव देह में जीवन , मीठे संबंधों की फुलवारी है, गुरु-शिष्य के संबंध में मेरा गुरु परब्रह्म देह धारी है। नाजों से संभाला, प्यार से सिंची मुझ फूल क्यारी है। कर्म काटे और रति भर पीड़ा नहीं, तेरी लीला न्यारी है। प्रार्थना भी क्या ही करूं,करुणा सारी मुझपे वारी है, बहुत दिया है तूने प्रभु , अब ऋण चुकाने की मेरी बारी है।
Really great poem...true devotion!
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