हमारा समर्पण परिवार


जीवन अंकुर का हो रहा सत्कार है ।
यह मेरा समर्पण परिवार है ।

कभी कभी होता रूठना मनाना
कभी मिलजुल जशन मनाना
जहा पे थोड़ा प्यार थोड़ी तकरार है।
ये मेरा समर्पण परिवार है।

नहीं चल पता नकरतमकता का राज
यहा पर मेरा स्वामी सब पे जेसे सर ताज
हम सब अलग अलग पर हमारा एक ही घर-बार है
ये मेरा समर्पण परिवार है ।

यहा पे सब लड़ रहे नकारात्मक्ता से
लाना है हम को हम मे बदलाव
क्योकि हमारी सकारात्मक्ता की सरकार है।
ये हमारा समर्पण परिवार है।

उसने संभाला है हम को सदियोसे
भला आज केसे छोड़ देगा ?
साथ मे सबको लेके चल रहा एक अकेला खेवनहार है।
क्यो की ये उसका प्यारा समर्पण परिवार है।



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