| हमारा समर्पण परिवार जीवन अंकुर का हो रहा सत्कार है । यह मेरा समर्पण परिवार है । कभी कभी होता रूठना मनाना कभी मिलजुल जशन मनाना जहा पे थोड़ा प्यार थोड़ी तकरार है। ये मेरा समर्पण परिवार है। नहीं चल पता नकरतमकता का राज यहा पर मेरा स्वामी सब पे जेसे सर ताज हम सब अलग अलग पर हमारा एक ही घर-बार है ये मेरा समर्पण परिवार है । यहा पे सब लड़ रहे नकारात्मक्ता से लाना है हम को हम मे बदलाव क्योकि हमारी सकारात्मक्ता की सरकार है। ये हमारा समर्पण परिवार है। उसने संभाला है हम को सदियोसे भला आज केसे छोड़ देगा ? साथ मे सबको लेके चल रहा एक अकेला खेवनहार है। क्यो की ये उसका प्यारा समर्पण परिवार है। |
आभार गुरुदेव
हे ईश्वर मेरा रोम रोम तेरा आभारी है, जितनी और जैसी दी ये जिंदगी बहुत प्यारी है। मानव देह में जीवन , मीठे संबंधों की फुलवारी है, गुरु-शिष्य के संबंध में मेरा गुरु परब्रह्म देह धारी है। नाजों से संभाला, प्यार से सिंची मुझ फूल क्यारी है। कर्म काटे और रति भर पीड़ा नहीं, तेरी लीला न्यारी है। प्रार्थना भी क्या ही करूं,करुणा सारी मुझपे वारी है, बहुत दिया है तूने प्रभु , अब ऋण चुकाने की मेरी बारी है।
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